Monday, June 15, 2009

धरती बन जाएगी आग का गोला




डायनासोर की राह पर जीव-जंतु!

डायनासोर धरती से अचानक विलुप्त हो गए। जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले बदलावों के कारण अन्य जीव-जंतुओं पर भी ऐसा ही खतरा मंडरा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, 2050 तक पृथ्वी के 40 फीसदी जीव-जंतुओं का खात्मा हो जाएगा!

क्या फिर पाषाणकाल में लौटना होगा !

आज पीढी दर पीढी सुविधाभोगी होती जा रही है। स्कूल जाने के लिए भी आप में से कई बाइक की जिद करते हैं। साइकिल चलाना शान के खिलाफ लगता है। वास्तव में, कुल ऊर्जा खपत का पांचवां हिस्सा हम निजी वाहनों के प्रयोग व सरकारी और बसों आदि के संचालन में ही धुआं कर देते हैं!

दूभर हो जाएगा सांस लेना!

जिंदा रहने के लिए सांस लेना जरूरी है, लेकिन हवा में लगातार कार्बन डाई आक्साइड की बढती मात्रा से जलवायु परिवर्तन के भयावह दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं। वैज्ञानिकों की मानें, तो आने वाले सौ सालों में वायुमंडल में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा मौजूदा स्तर की तीन गुना हो जाएगी। सोचिए! कितना भयावह होगा वह मंजर जब हर कोई ऑक्सीजन मास्क पहने नजर आएगा? जीवनशैली में बदलाव लाकर व ऊर्जा बचत के छोटे-छोटे नुस्खे अपनाकर हर साल करोडों टन कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन रोक सकते हैं।

गायब हो जाएगी गंगा!

जिस गंगोत्री ग्लेशियर से जीवनदायिनी गंगा नदी निकलती है, वह हर साल 37 मीटर की रफ्तार से सिकुडता जा रहा है। जरा सोचिए, गंगोत्री ग्लेशियर के सिकुडने की रफ्तार यही रही तो गंगा का क्या होगा?

करोडों पर कहर !

हर वर्ष 32.5 करोड लोग जलवायु परिवर्तन के कहर से आने वाली बाढ, सूखा और बीमारियों से गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं।

आबादी का बढता बोझ !

साल दर साल बढती आबादी के बोझ से धरती माता कराह रही हैं। आबादी बढने से उसी अनुपात में प्राकृतिक संसाधनों (हवा, पानी, जमीन, पेड-पौधे आदि) का प्रयोग भी बढ रहा है। पिछले पच्चीस साल में दुनिया की आबादी में करीब एक तिहाई बढोतरी हुई है। अगर यही हाल रहा तो खडे होने के लिए जमीन मिलनी मुश्किल हो जाएगी।

बदलना होगा जीने का तरीका!

इन दिनों ज्यादातर लोग आलीशान जीवन जीने के आदी हो चुके हैं। इन्हें शायद नहीं पता है कि इस विलासिता के जरिए वे धरती को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं। जब पृथ्वी ही नहीं रहेगी तो हमारा वजूद किस पर टिकेगा। आपको जानकर हैरत होगी कि दुनिया में कुल खर्च की जाने वाली ऊर्जा का 11 फीसदी हिस्सा केवल घर को गर्म, ठंडा और प्रकाशमय करने केसाथ-साथ घरेलू उपकरणों के प्रयोग में खर्च होता है!

जल समाधि ले लेंगे शहर !

तेजी से पिघलती बर्फ और ग्लेशियरों से समुद्र का जलस्तर बढ रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर इसी तरह समुद्र का जल-स्तर बढता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब समुद्र से सटे शहरों और देशों के नामोनिशां मिट जाएंगे। बांग्लादेश, न्यूयार्क सिटी का मैनहट्टन और नीदरलैंड पूरी तरह तबाह हो सकते हैं।

भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई के साथ-साथ कोलकाता और मद्रास जैसे शहरों पर भी खतरे

मंडरा रहे हैं!

खत्म हो जाएगा कोयला !

अगर इसी रफ्तार से कोयले का प्रयोग जारी रहा, तो अगले सवा सौ सालों में इसका भंडार समाप्त हो सकता है।

हमारी आने वाली नस्लें इसे केवल संग्रहालयों में देख सकेंगी!

बिन पानी कैसी होगी जिंदगानी !

जीवन के लिए पानी की जरूरत का अहसास प्यास लगने पर ही होता है। कोई विकल्प नहीं है इसका। स्वच्छ जल घट रहा है। 2025 तक विकासशील देशों में पानी की मांग में 50 फीसदी जबकि विकसित देशों में 18 फीसदी की बढोतरी हो जाएगी। वर्तमान में उपलब्ध जल का 70 फीसदी सिंचाई के लिए प्रयोग होता है।

अरबों की बर्बादी

जलवायु परिवर्तन के चलते हर साल 6000 अरब रूपये स्वाहा हो जाते हैं। इतनी बडी रकम का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं, यह हमारे वित्तमंत्री द्वारा पेश किए जाने वाले कुल बजट से थोडा ही कम है!

एक्ट मोर यूज लेस

रोजाना की दिनचर्या में थोडे बदलाव लाकर हम भी कर सकते हैं पर्यावरण संरक्षण में योगदान। आइए जानें, किन-किन उपायों से संभव होगा यह..

चेहरा धोते समय या ब्रश करते समय नल को बंद रख कर बहुमूल्य जल को बचा सकते हैं

बाथरूम में लो फ्लो वाला शावरहेड लगाकर पानी की बचत कर सकते हैं। ऊर्जा बचाने के लिए हीटर में टाइमर का भी प्रयोग किया जा सकता है।

शरीर को पोछने के लिए टिशू पेपर के बजाय तौलिए का प्रयोग करें।

लंच को अल्युमिनियम-पन्नी और प्लास्टिक आदि में लपेटने की बजाय पुन: उपयोग किए जा सकने वाले डिब्बों में पैक करें।

घर से निकलते समय सारी लाइटें और बिजली के उपकरणों के स्विच अॅाफ करने की आदत डालें। चार्जर को प्लग से निकालकर अलग करें क्योंकि प्लग में लगे रहने से बिना चार्जिग के बिजली खपत होती रहती है। ऊर्जा बचत वायु प्रदूषण कम करने में सहायक होती है।

पेड लगाने के अपने शौक को फिर से जिंदा कीजिए। अपने बच्चों, रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों को इसके फायदे बताकर पेड लगाने के लिए प्रोत्साहित कर नेक काम कर सकते हैं।

छोटी-छोटी दूरी के लिए वाहन न प्रयोग करने की आदत डालें। ऐसा करके न केवल आप पर्यावरण की रक्षा में अपना अहम योगदान करेंगे बल्कि इससे आपकी बचत भी होगी। और पैदल चलने से आपका व्यायाम भी हो जाएगा। इसे कहते हैं, आम के आम गुठलियों के दाम।

लिखने के लिए कागज की जरूरत होने पर पुराने डाक्यूमेंट के दूसरी तरफ लिख सकते हैं।

प्लास्टिक कचरों में वृद्धि करने वाली सामग्रियों का प्रयोग करने से बचें।

BEST OF 1981 VOLUME 2 (1982) / OST VINYL RIP FLAC 16 BIT 192 KHZ

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